जेल की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, हथियारों से लैस हिस्ट्रीशीटर जेल तक कैसे पहुंचे

मेरठ। हथियारों से लैस हिस्ट्रीशीटर शोकिंद्र उर्फ जोनी, विपिन कुमार, हत्यारोपी के बेटे शुभम और उसके दोस्त पुनीत ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर मेरठ पुलिस की चेकिंग और जेल की सुरक्षा की पोल खोल दी। 

फायरिंग के दौरान जेल परिसर में बंदियों और मुलाकातियों में अफरातफरी मच गई। आशंका है कि हिस्ट्रीशीटर जेल में बंद हत्यारोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख को छुड़ाने तो नहीं गए थे क्योंकि हत्यारोपी के मुकदमे में कोर्ट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उसका फैसला जल्द आने की उम्मीद है। इसे लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। 

जिला जेल से करीब 100 मीटर की दूरी पर एडीजी मेरठ जोन का कार्यालय व आवास है। जेल परिसर से पहले मेडिकल थाने की पुलिस चौकी है। मुलाकातियों की जेल में दिनभर आवाजाही रहती है। इसे देखते हुए पुलिस चौकी पर बैरियर लगाकर मेडिकल और जेल पुलिस द्वारा चेकिंग करने का प्रावधान है। इसके बावजूद जेल के मुख्य गेट तक पहुंचने वालों की कोई चेकिंग पुलिस नहीं करती है। 

इसी का नतीजा है कि शनिवार को दो हिस्ट्रीशीटर शोकिंद्र और विपिन सहित चार लोग जेल की पार्किंग में हथियार लेकर पहुंच गए। बदमाशों ने पहले धमकी दी, फिर 10 मिनट बाद जेल की पार्किंग में घुसकर रसूलपुर, भावनपुर ग्राम प्रधान पर गोलियां चला दीं। एक आरोपी पुनीत वहां से भाग निकला। भले ही मेडिकल पुलिस हिस्ट्रीशीटर शोकिंद्र, विपिन और हत्यारोपी के बेटे शुभम को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन वारदात ने मेरठ और जेल पुलिस के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।

इंस्पेक्टर मेडिकल दिनेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि हत्यारोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र चौधरी का ट्रायल कोर्ट में लगभग पूरा हो चुका है। कोर्ट जल्द ही फैसला सुना सकती है। कई बंदी जेल परिसर में खेतीबाड़ी भी करते हैं। सात साल पहले एक बंदी खेतीबाड़ी करते हुए फरार हो चुका है। 

संवेदनशील क्षेत्र है जेल मार्ग :
जेल चुंगी से जेल मार्ग तक का क्षेत्र बेहद संंवेदनशील है। जेल में 2500 से अधिक बंदी हैं। इसकी सुरक्षा में पुलिस बल तैनात है। बंदियों पर निगरानी के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है। फिर भी यहां घटना हुई। 

हत्या, लूट व डकैती के आरोपी हैं हिस्ट्रीशीटर 
एसपी सिटी पीयूष सिंह का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर शोकिंद्र और विपिन का आपराधिक रिकॉर्ड मिला है। शोकिंद्र पर हत्या, रासुका, बलवा और लूट-डकैती सहित कई गंभीर धारा में हस्तिनापुर, मवाना, इंचौली थाने में मुकदमे पंजीकृत हैं। विपिन पर भी हत्या, लूट-डकैती, अपहरण सहित कई मुकदमे हस्तिनापुर, मवाना थाने में दर्ज हैं। ये दोनों शातिर अपराधी हैं और वर्ष 2009 से लगातार अपराध कर रहे हैं। पूर्व ब्लाक प्रमुख हस्तिनापुर राजेंद्र चौधरी ने गैंग बनाया हुआ है। इसमें दोनों हिस्ट्रीशीटर शामिल हैं। वह हर महीने जेल में राजेंद्र से मुलाकात करने आते थे। 

चौकी इंचार्ज छुट्टी पर भगवान भरोसे थी सुरक्षा 
इस घटना में मेडिकल पुलिस की लापरवाही सामने आई है। जेल चौकी इंचार्ज बिजेंद्र सिंह छुट्टी पर है। जिनकी अनुउपस्थिति में जेल चुंगी चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार पर जेल की चौकी का प्रभार था। घटना के वक्त दरोगा अरविंद कुमार भी मौके पर नहीं थे। इंस्पेक्टर मेडिकल का दावा है कि जेल चौकी पर मेडिकल थाने के तीन सिपाही शैलेश, नितिन और राजकुमार मौजूद थे। 

यह घटना जेल के बाहर हुई है, जहां पर मेडिकल पुलिस की ड्यूटी रहती है। जेल में आने मुलाकातियों की तलाशी होती है। सीसीटीवी कैमरे से जेल में बंदियों की, मुलाकातियों की और परिसर में आने वाले लोगों की निगरानी होती है। जेल में सुरक्षा मुस्तैद है। – राकेश कुमार, जेल वरिष्ठ अधीक्षक

ग्राम प्रधान शबनम की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। दो हिस्ट्रीशीटर सहित तीन आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। जेल पार्किंग में लाइन में खड़े होने को लेकर दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई थी। जिसके बाद आरोपी पिस्टल लेकर जेल की पार्किंग में पहुंचे और गोलियां चला दी। आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  – रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी 

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