Mother’s Day 2023 : बेटी और मां सहेलियां बन जाएं तो उससे अच्छा कुछ नहीं होता, सुनिए ‘दूसरी मां’ से खास बातचीत

जिन्होंने भी उन्हें फिल्म ‘दृश्यम 2’ में देखा, वह उनके अभिनय के मुरीद हुए बिना नहीं रह सके। इस फिल्म में सलगांवकर परिवार की पड़ोसन जेनी के भेस में वह दरअसल एक पुलिस कर्मचारी हैं और एक खास मिशन के तहत जासूसी कर रही है। जी हां, बात हो रही है रंगमंच, धारावाहिकों और सिनेमा की दमदार अदाकारा नेहा जोशी की। नेहा जोशी को अभिनय घुट्टी में मिला है, उनके माता पिता मराठी रंगमंच के सिद्ध कलाकार हैं। और, नेहा ने भी कथक नृत्य और शास्त्रीय गायन सीखने के बाद अभिनय को ही अपने जीवन की साधना बना रखा है। नेहा इन दिनों जयपुर स्थित जी स्टूडियोज में धारावाहिक ‘दूसरी मां’ की शूटिंग कर रही हैं।

मेरी मां ही मेरी पहली सहेली

नेहा बताती हैं, ‘मेरे जीवन में मां का स्थान जो है वह ऐसा है कि जिसे शब्दों में मैं बयां नहीं कर सकती। वह मेरी पहली सहेली बनीं। उनका मेरे ऊपर विश्वास ऐसा रहा है कि मैं कभी भी, कुछ भी, कहीं भी करती हूं तो सबसे पहले जाकर अपनी मां को ही बताती हूं। जीवन में पहली बार प्यार हुआ तो भी जाकर सबसे पहले उन्हें ही बताया। जिनसे प्यार हुआ, उन्हें भी लगा कि ये क्या बात हुई? मैंने उन्हें भी यही समझाया कि मां और बेटी का हमारा रिश्ता ऐसा ही है, बिल्कुल सहेलियों जैसा।’

नृत्य और गायन के बाद अभिनय 

मातृ दिवस के लिए ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत करते हुए नेहा बताती हैं, ‘मेरे आई-बाबा (माता पिता) ने कभी भी मुझ पर किसी खास विषय में अपना भविष्य बनाने के लिए दबाव नहीं डाला। वह बस यही कहते रहे कि हम तुम्हारे लिए अलग अलग क्षेत्र में विकसित होने के मौके दे रहे हैं। करना तुम्हें क्या है, ये तुम निर्णय करो। मैंने कथक सीखा। आठ साल तक शास्त्रीय संगीत में गायन सीखा। लेकिन, अभिनय वह क्षेत्र रहा जिसमें आकर मुझे आत्मिक संतुष्टि मिली।’

मां के साथ समय गुजारना ही संतुष्टि 

लेकिन, जीवन में जिस बात से नेहा को सबसे अधिक संतुष्टि मिलती है वह है उनका अपनी मां के साथ समय गुजारना। वह बताती हैं, ‘माता पिता के साथ अगर बचपन से बच्चे का आत्मीय रिश्ता रहा है, बच्चे को मां बाप का स्नेह और दुलार लगातार मिलता रहा है, तो बच्चा अपने मां बाप के साथ ही रहना चाहेगा। मां-बाप के बुजुर्ग होने पर ऐसा बच्चा खुद को उनका अभिभावक मानने लगता है। पैतृक प्रेम ही वात्सल्य का असली निवेश है। मां बाप अगर बच्चे को उसकी उड़ान मन से करने देते हैं, तो वह भी सात आसमान नापने के बाद अपनी नीड़ में ही विश्राम करने लौटता है।’

गलती और अपराध में अंतर समझाएं 

नेहा एक और महत्वपूर्ण बात कहती हैं। उनके मुताबिक, किसी मां का अपने लाडले की परवरिश में उसकी शरारतों पर नाराज न होने का बच्चे के मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है। बच्चे को ये महसूस तो होना चाहिए कि उसने गलती की है। लेकिन, गलती और अपराध में यदि अंतर बच्चे को शुरू से समझाया जाए तो उसका मानसिक और शारीरिक विकास बहुत सलीके से होता है। मां की ये काउंसलिंग बच्चे का मजबूत आधार बनती है और यही मैं अपने किरदार के जरिये एंडटीवी के धारावाहिक ‘दूसरी मां’ में कर रही हूं।’

जो मिला वही लौटाएगा बच्चा 

नेहा कहती हैं, ‘बिना दोषसिद्ध हुए बच्चों को कभी दंड नहीं देना चाहिए, शारीरिक दंड तो बच्चा ताउम्र नहीं भूल पाता है और इससे उसका मानसिक विकास भी बाधक होता है। मां और बच्चे के बीच सिर्फ एक ही रिश्ता है और वह है प्यार और आशीर्वाद का। बच्चा बड़ा होकर अपने मां बाप को वही लौटाता है जो उसने बचपन में पाया है।’

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