जानलेवा हुआ H3N2 virus, जानिए लक्षण, इलाज, Covid जैसा खतरा और बचाव पर सभी सवालों के जवाब

नई दिल्ली। तीन साल बाद कोरोना महामारी से राहत मिल रही थी, लेकिन इन्फ्लूएंजा वायरस H3N2 ने फिर से चिंता बढ़ा दी है. कुछ महीनों से सर्दी-जुकाम और बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लेकिन अब ये जानलेवा भी बनता जा रहा है. इस वायरल बीमारी से अब तक 6 लोगों की मौत हो गई है. सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक, पंजाब और हरियाणा में H3N2 से मौत हुई है. हालांकि, अभी और जांच की जा रही है।

एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि मौसम बदलने पर फ्लू के मामले बढ़ते जरूर हैं, लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही मरीज सामने आ रहे हैं।

कुछ दिन पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने बताया था कि बीते दो-तीन महीनों से इन्फ्लूएंजा वायरस के A सबटाइप H3N2 के कारण बुखार और सर्दी-खांसी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि H3N2 के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।

H3N2 के लक्षण कोरोना के तरह ही हैं जो चिंता बढ़ाते हैं. इसकी चपेट में आने के बाद लोगों को थकान और कमजोरी से उबरने में दो हफ्ते से ज्यादा का समय लग रहा है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का कहना है कि मौसमी बुखार फैल रहा है. बुखार तो दो-तीन दिन में चला जाता है लेकिन सर्दी-खांसी तीन हफ्तों तक रह रही है. प्रदूषण के कारण भी 15 साल से कम और 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में सांस की नली में संक्रमण बढ़ रहा है।

1 . कहीं कोविड ही तो नहीं फैल रहा फिर से?

  • कानपुर के हैलट हॉस्पिटल की डॉ. ऋचा गिरी ने बताया कि कोविड और इस वायरस में अंतर कर पाना काफी मुश्किल है क्योंकि इन्फ्लूएंजा A का सबटाइप है.
  • उन्होंने बताया कि सिर्फ टेस्ट के जरिए ही दोनों में अंतर पता किया जा सकता है. कोविड और इन्फ्लूएंजा कि टेस्टिंग किट भी अलग-अलग होती है.
  • एम्स दिल्ली के मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. पीयूष रंजन ने बताया कि कोविड लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है, जबकि H3N2 अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट पर असर डालता है जिसमें बुखार और सर्दी-खांसी जैसे लक्षण लंबे समय तक रहते हैं.
  • डॉ. पीयूष ने बताया कि दोनों के लक्षण लगभग एक जैसे ही हैं, इसलिए कई अस्पतालों में H3N2 का टेस्ट किया जा रहा है लेकिन ये टेस्ट गैरजरूरी और महंगा है और ये सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रहा है. निजी अस्पतालों में इसकी जांच 6 हजार रुपये में होती है
  1. H3N2 की जांच कब जरूरी?
  • एम्स दिल्ली में प्लमोनोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. अनंत मोहन बताते हैं कि H3N2 की जांच बहुत गंभीर और अप्रत्याशित मामलों में ही की जानी चाहिए या फिर जब मरीज ठीक नहीं हो रहा है या फिर इन्फ्लूएंजा संक्रमण पकड़ में न आ रहा हो.
  • उन्होंने बताया कि इस बार सूखी खांसी के मरीज ज्यादा हैं. इसके ज्यादातर मरीज बिना किसी खास इलाज के ही ठीक हो जाते हैं. इन्फ्लूएंजा से संक्रमित ज्यादातर लोगों को चेस्ट एक्स-रे की जरूरत भी नहीं पड़ती.

3 – H3N2 के लक्षण क्या हैं?

  • नाक बहना.
  • तेज बुखार.
  • खांसी (शुरुआत में गीली और फिर लंबे समय तक सूखी)
  • चेस्ट कंजेशन
  • WHO के मुताबिक, मौसमी इन्फ्लूएंजा से संक्रमित होने पर बुखार, खांसी (आमतौर पर सूखी), सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, थकावट, गले में खराश और नाक बहने जैसे लक्षण नजर आते हैं.
  • ज्यादातर लोगों का बुखार एक हफ्ते में ठीक हो जाता है लेकिन खांसी ठीक होने में दो या उससे ज्यादा हफ्ते का समय लग जाता है।

4 – क्यों बढ़ रही है इनफ्लुएंजा के मामले ?

दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेन गुप्ता बताते हैं कि ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना के कारण हमारी इम्युनिटी कमजोर हो गई है. ऐसे में न सिर्फ वायरल इन्फेक्शन के केस बढ़ रहे हैं, बल्कि इनकी गंभीरता भी बढ़ रही है.

  • डॉ. गुप्ता ने बताया कि हम उम्मीद कर रहे थे कि कोविड के बाद इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियां कम हो जाएंगी लेकिन इसका उल्टा हो रहा है. वायरल इन्फेक्शन बढ़ रहे हैं जो अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *